ख़ून बरसा ख़ून बरसा
ना बरसना था ना बादल बरसे
इक इक बूँद की पानी को शहे दीन तरसे
ख़ून बरसा ख़ून बरसा
ना बरसना था ना बादल बरसे
प्यास जब हद से बढ़ी रोके सकीना ने कहा (x2)
दूर कितनी है चचा
नहर बताओ घर से
ख़ून बरसा ख़ून बरसा
ना बरसना था ना बादल बरसे
ग़श में है ग़ुंचादहन प्यास से ऐंठी है ज़बाँ (x2)
चौंक के रोए तो क्या कह दूँ अली असग़र से
ख़ून बरसा ख़ून बरसा
ना बरसना था ना बादल बरसे
अब कहाँ ख़ाक़ पे बैठी हो सकीना उट्ठो (x2)
कौन आया है पलट कर जो गया रण घर से
ख़ून बरसा ख़ून बरसा
ना बरसना था ना बादल बरसे
ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है किस किसकी ज़बा रोकोगे (x2)
लब हो ख़ामोश तो सदा आती है खंजर से
ख़ून बरसा ख़ून बरसा
ना बरसना था ना बादल बरसे
मेरे नाना के मदीने तुझे ज़ैनब का सलाम (x2)
ठोकरे खा के मैं पलट आई हूँ दर दर से
ख़ून बरसा ख़ून बरसा
ना बरसना था ना बादल बरसे
ख़ून बरसा ख़ून बरसा
ना बरसना था ना बादल बरसे

